भाजपा के वरिष्ठ नेता यदविंदर सिंह बुट्टर ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा को दीया एक ज्ञापन ।

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बटाला 22 दिसंबर ( अविनाश शर्मा, सुनील चंगा     ) भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता यदविंदर सिंह बुट्टर ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा को एक ज्ञापन दिया, जिसमें लिखा है कि बटाला शहर पंजाब राज्य के गुरदासपुर जिले का एक बहुत ही ऐतिहासिक शहर है। 
महाराजा शेर सिंह का जन्म इस शहर में वर्ष 1807 में हुआ था और बटाला शहर में उनका महल और बारांदरी आज भी मौजूद हैं। 1849 में ब्रिटिश सरकार द्वारा पंजाब पर कब्जा करने के बाद, महाराजा शेर सिंह का महल रेव हेनरी बेरिंग को 1878 में 99 साल की लीज पर दे दिया गया था। इस ऐतिहासिक महल के परिसर में बाद में बेरिंग स्कूल और बेरिंग यूनियन क्रिश्चियन कॉलेज थे। महाराजा शेर सिंह पैलेस की लीज 1977 में समाप्त हो गई और ऐतिहासिक इमारत सरकार के स्वामित्व में है। भले ही महाराजा शेर सिंह पैलेस की लीज पिछले कई दशकों से समाप्त हो चुकी है, लेकिन यह ऐतिहासिक इमारत बेरिंग कॉलेज के कब्जे में है। भारतीय और इतालवी वास्तुकला की मिसाल यह इमारत रख-रखाव के अभाव में जर्जर हो चुकी है और आम लोगों को इस ऐतिहासिक इमारत में घुसने तक की इजाजत नहीं है।
इस ऐतिहासिक महल के सामने कुछ साल पहले पंजाब सरकार द्वारा लैंडस्केपिंग कराई गई थी, लेकिन इमारत की मरम्मत नहीं हो सकी थी। इस संबंध में भाजपा नेता यदविंदर सिंह बुट्टर द्वारा अनुरोध किया गया था कि इस ऐतिहासिक इमारत को संरक्षित इमारत घोषित कर इसकी देखरेख की जाए और यहां पंजाब के गौरवशाली इतिहास से जुड़ा एक संग्रहालय स्थापित किया जाए।
महाराजा रणजीत सिंह भी अक्सर महाराजा शेर सिंह पैलेस बटाला में ठहरते थे। इसके अलावा महाराजा रणजीत सिंह की सास और महाराजा शेर सिंह की दादी श्रीमती सदा कौर का संबंध भी इस महल से है।
सिख साम्राज्य के दौरान, महाराजा अपने निवास में श्री गुरु ग्रंथ साहिब को रोशन करते थे और इसी तरह महाराजा शेर सिंह पैलेस में भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब को रोशन किया जाता था। इस कारण सिखों की धार्मिक आस्था भी इस भवन से जुड़ी हुई है लेकिन ब्रिटिश सरकार ने न केवल इस महल पर कब्जा कर लिया बल्कि गुरुद्वारे को भी नष्ट कर दिया।
इस ऐतिहासिक महल के सामने शमशेर खान के तालाब में महाराजा शेर सिंह द्वारा बनवाई गई एक बारांदरी भी है। इस इमारत और तालाब को भारतीय पुरातत्व विभाग, केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। यह तालाब पिछले तीन दशक से सूखा पड़ा है।
उन्होने कहा कि अनुरोध है कि सरकार इस सरोवर को जल से भर दे, तब इस ऐतिहासिक स्मारक की सुन्दरता और स्वरूप पुनः स्थापित हो सकेगा। इस टैंक को भरने के लिए पास के गाँव शाहबाद या उमरपुरा से नहर पानी की पाइप लाइन भी डाली जा सकती है।उन्होंने पत्र में लिखा है कि महाराजा शेर सिंह महाराजा रणजीत सिंह के पुत्र थे और रणजीत सिंह की मृत्यु के बाद वे भी पंजाब के महाराजा रहे थे।
उनके शासनकाल में महाराजा शेर सिंह द्वारा भारत की सीमाओं को तिब्बत तक बढ़ाया गया था और चीन के साथ 'चिशुल की संधि' पर भी महाराजा शेर सिंह ने हस्ताक्षर किए थे।
भाजपा के वरिष्ठ नेता बुट्टर द्वारा अनुरोध किया गया था कि बटाला शहर में महाराजा शेर सिंह के ऐतिहासिक महल और सरोवर में बारांदरी को संरक्षित किया जाए और यहां एक संग्रहालय बनाया जाए ताकि युवा पीढ़ी अपने इतिहास के बारे में जान सके।
भाजपा नेता यदविंदर सिंह बुट्टर की कोशिश तब रंग लाई जब राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह ने मुख्य सचिव पंजाब को मांग पत्र की जांच करने और 30 दिसंबर से पहले रिकॉर्ड भेजने का निर्देश दिया।
इस मौके पर प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य यदविंदर सिंह बुट्टर ने बातचीत दौरान कहा कि परमात्मा का सहयोग लेकर ऐतिहासिक शहर बटाला के लोगों को उनका हक दिलाकर ही सांस लेंगे।


कैप्शन- भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता यदविंदर सिंह बुट्टर, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा को ज्ञापन देते हुए।

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