बटाला 12 फरवरी ( अविनाश शर्मा, चरण सिंह) दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से भैनी मियां खान (गुरदासपुर) में हो रही श्रीमद्भागवत साप्ताहिक कथा ज्ञानयज्ञ के अंर्तगत चतुर्थ दिवस की सभा में सर्वश्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री गौरी भारती जी ने प्रभु के अवतारवाद के विषय में बताया। प्रभु धर्म की रक्षा हेतु प्रत्येक युग में आते हैं।
भक्तों का कल्याण करने तथा दुष्टों को तारने वे हर युग में अवतार लेते हैं। द्वापर में कंस के अत्याचार को समाप्त करने के लिए प्रभु धरती पर आए। उन्होंने गोकुल वासियों के जीवन को उत्सव बना दिया। कथा के माध्यम से नंद महोत्सव की धूम देखने वाली थी। साध्वी बहनों ने मिलकर प्रभु के आने की प्रसन्नता में बधावा गाया। आज गोकुल के उत्सव को देखने का अवसर सभी को प्राप्त हो गया।
सोचने की बात है जब नंद बाबा भगवान को टोकरी में डाल कर गोकुल लेकर गये तो उस समय प्रभु हमें संदेश देते हैं। जिस प्रकार नंद बाबा ने मुझे सिर पर धारण किया। तभी उनकी हाथों पैरों की बेडियां टूट गयीं। इसी प्रकार जो मुझे
जीवन में प्रथम स्थान पर रखता है। मैं उसके लिए आत्मजाग्रति के द्वार खोल देता हूँ। मैं युगों-युगों से आत्मज्ञान के लिए प्रेरित करता आया हूं। परंतु आत्मा के जागरण के बिना मानव नरसंहार करता आया है। अपने मन के बिखराव को समेट नहीं पाया।भीतर की शक्ति का सदुपयोग नहीं करना आया। मन के भटकन के कारण समाज को अपने अनुचित व्यवहार कारण दूषित कर
रहा है | भगवान श्री कृष्ण जी ने विभिन्न प्रकार की लीलायें की। वो माखन चोरी करते तो भक्तों ने माखन चोर कह दिया। माखन चोरी की लीला से उन्होंने भक्तों के भावों को ग्रहण किया। उनके भीतर उपजी हीनता की भावना का अंत किया। प्रेम की प्रगाढ़ता स्थापित की। इस लीला का भावार्थ यही है कि प्रभु हमारे भीतर शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक संतुलन स्थापित करना चाहते हैं। हमारे आयुर्वेद में भी ऐसे संतुलन के बारे में कहा गया है। आयुर्वेद विश्व का आदि प्राचीन चिकित्सा विज्ञान है। यह विज्ञान के साथ-साथ जीवन का दर्शन भी बताता है। यह हमारे ऋषियों की खोज है। परंतु हम इस की वैज्ञानिकता से अपरिचित हैं। आज पूरे विश्व में आयुर्वेद का प्रभाव फैल रहा है। अमेरिका ने तो आयुर्वेद से कैंसर के उपचार को खोजना प्रारंभ भी कर दिया है। अमेरिका के स्वास्थ्य विभाग ने भारत के आयुर्वेद संस्थानों से हाथ मिलाया है। अदरक की एक विशेष प्रजाति से कैंसर का उपचार संभव है, इस दिशा में शोध भी हो चुका है। धनतेरस वाले दिन हम धनवंतरि जी को स्मरण करते संकल्प ले कि हम आयुर्वेद को प्राथमिकता देगें। आयुर्वेद का प्रयोजन यही कि स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य को ठीक रखना तथा रोगी को रोगमुक्त बनाना। पूरी दुनिया के लोग आयुर्वेद को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। हम पीछे न रह जाये। आज ऐसी जाग्रति की आवश्यकता है।
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