देश की एकता और अखंडता स्थापित करने के लिए आडवाणी ने हमेशा सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ आवाज उठाई : परमजीत सिंह गिल

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 आडवाणी को भारत रत्न देने का मोदी सरकार का फैसला सराहनीय 

 बटाला (अविनाश शर्मा, चरण सिंह)प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व प्रधानमंत्री और श्री राम मंदिर के लिए अथक प्रयास करने वाले दिग्गज राजनेता लाल कृष्ण आडवाणी को भारत रत्न देने का जो निर्णय लिया है,  हिमालय परिवार संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं लोकसभा क्षेत्र गुरदासपुर के वरिष्ठ नेता परमजीत सिंह गिल ने उनकी खूब सराहना की।

 गिल ने कहा कि भाजपा के लौह पुरुष कहे जाने वाले आडवाणी देश की एकता, अखंडता और भाईचारे को बनाए रखने के लिए हमेशा सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ खड़े रहे।

 गिल ने कहा कि आडवाणी ने न सिर्फ अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा उठाया बल्कि इस काम के लिए अथक प्रयास भी किये।

  1990 में आडवाणी ने राम मंदिर मुद्दे को गंभीरता और सशक्तता से उठाते हुए राम रथ यात्रा शुरू की थी।

 गिल ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के पुनर्निर्माण में आडवाणी के प्रयास सराहनीय रहे हैं और उन्होंने सनातन धर्म को बचाने और देश में आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है।  इसके साथ ही उन्होंने हमेशा देशभक्ति का सबूत देकर देश विरोधी ताकतों का विरोध किया और जब भी वह सत्ता में आए, उन्होंने ऐसी देश विरोधी ताकतों के खिलाफ़ ठोस कदम उठाए।

 गिल ने कहा कि आडवाणी देश के गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री भी रहे और उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान जम्मू कश्मीर से कन्या कुमारी तक देश को एक सूत्र में पिरोया और कभी किसी धर्म या जाति के साथ भेदभाव नहीं किया।

 गिल ने कहा कि देखा जाए तो देश के निर्माण में आडवाणी के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता । जहां आज देशवासी अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण से उत्साहित हैं और उन्हें लगता है कि श्री राम मंदिर के निर्माण के बाद सनातन फिर से नई ऊंचाइयों को छूएगा और इस कार्य में लालकृष्ण आडवाणी के महानतम योगदान को कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
गिल ने कहा कि आडवाणी को देश का सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार देना देश के लिए, भाजपा और खास कर संगठन के लिए बहुत बड़ी सम्मान की बात है।

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