कठुआ(जम्मू) :गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज (GDC), कठुआ में दिवंगत प्रो. रविंदर रामपाल की स्मृति में “जलवायु परिवर्तन और आपदा: चुनौतियां, लचीलापन एवं भविष्य की राह” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कॉलेज की लिटरेरी कमेटी द्वारा डॉ. डी. के. रामपाल ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन और सतत विकास के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम में जम्मू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. आर. डी. शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. मनोहर लाल ने सभी अतिथियों, शिक्षाविदों, निर्णायक मंडल और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए पर्यावरण जागरूकता व वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास में ऐसी गतिविधियों की भूमिका को रेखांकित किया।
इस अवसर पर पूर्व वार्ड सदस्य एवं समाजसेवी राहुल देव विशेष आमंत्रित अतिथि रहे। इसके अलावा गवर्नमेंट कॉलेज फॉर वूमेन, कठुआ के प्रिंसिपल प्रो. जय पाल सिंह, गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, बसोहली के प्रिंसिपल प्रो. राज किरण और डॉ. डी. के. रामपाल ट्रस्ट के ट्रस्टी विनय रामपाल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
संगोष्ठी में विभिन्न कॉलेजों के विद्यार्थियों ने जलवायु परिवर्तन के कारणों, आपदा प्रबंधन और सामुदायिक तैयारियों पर अपने विचार रखे। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों का मूल्यांकन पूर्व प्रिंसिपल प्रो. एम. एस. पठानिया, पूर्व प्रिंसिपल प्रो. अनिरुद्ध शर्मा और सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष (अंग्रेजी) प्रो. सरूप चंदर के निर्णायक मंडल द्वारा किया गया।
प्रतियोगिता के परिणाम:
- प्रथम स्थान: अनामिका (जीडीसी कठुआ)
- द्वितीय स्थान: अक्षय कुमार (जीडीसी मरहीन)
- तृतीय स्थान: दानिश भगत (जीडीसी सांबा)
इसके अतिरिक्त हरलीन कौर, तानिया राजपूत, सानिया बिल्लोवरिया, पल्लवी चौधरी, पलक दुब्ब और सादिया नाज को भी उनके प्रदर्शन के लिए नकद पुरस्कार प्रदान किए गए।
मुख्य अतिथि प्रो. आर. डी. शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि पूर्व तैयारी, जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी से ही प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियों से निपटा जा सकता है। कार्यक्रम में लिटरेरी कमेटी के संयोजक डॉ. नीरज शर्मा, प्रो. संदीप चौधरी, डॉ. ईवा शर्मा, डॉ. निताशा बलोरिया, डॉ. कमलजोत कौर और प्रो. सुप्रीत कौर सहित विभिन्न विभागों के प्राध्यापक उपस्थित थे। अंत में उर्दू विभाग के विभागाध्यक्ष एवं स्टाफ सचिव डॉ. यश पाल शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
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