मानव अपने ही भीतर बैठे परमात्मा को न जानने वह शांति से दुखी है लेकिन वह तब तक नहीं जान सकता जब तक जीवन में गुरु का आगमन नहीं होता:- साध्वी शोभा भारती।

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बटाला  (अविनाश शर्म, सुनील चंगा) दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से कम्युनिटी हाल खजूरी गेट के पास चल रही पांच दिवसीय श्रीराम कथा में श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री सौम्या भारती जी ने राम विवाह प्रसंग का वाचन किया। उन्होंने बताया कि मानव जीवन राम व सीता के मिलन का एक दुर्लभ अवसर है। राम भाव परमात्मा तथा सीता अर्थात आत्मा। लेकिन आज का मानव अपने इस वास्तविक लक्ष्य से अनभिज्ञ है। मननशील प्राणी होते हुए भी वह उस तत्व पर विचार नहीं करता जिस पर मनन करके उसे जीवन का लक्ष्य मिल सकता है। सारे संसार का ज्ञान रखने वाला आदमी इस रहस्य से अपरिचित है। इसलिए आज मानव अपने ही भीतर बैठे परमात्मा को ना जानने से दुखी व अशांत है। लेकिन वह उसे तब तक नहीं जान सकता जब तक उसके जीवन में गुरु का आगमन नहीं होता। क्योंकि यह सृष्टि का अटल नियम है कि जिस से भी परमात्मा रूपी रहस्य की पुष्टि हुई, उसके जीवन में पहले पूर्ण गुरु का आगमन हुआ।
 गुरु की पहचान बताते हुए साध्वी जी ने कहा कि गुरु शब्द दो शब्दों के मिलाप से बना है। 'गु' और 'रु' । 'गु' भाव अंधकार और 'रु' भाव प्रकाश। जो मानव के अंतः करण में व्याप्त अंधकार व ईश्वर संबंधी संदेहों को प्रकाश व आतम ज्ञान के माध्यम से तिरोहित कर दे वही पूर्ण व ब्रह्मनिष्ठ गुरु है। लेकिन आज ऐसे गुरु का संग प्राप्त न होने के कारण ही मानव का अंतः करण अंधकार से भरा हुआ है। जिस प्रकार बाहर अंधेरा होने पर हम पथ से भटक जाते हैं वैसी ही स्थिति आज परिवार, समाज, देश व राष्ट्र की है। चारों तरफ वैमनस्य, कोलाहल, खून की होली, संस्कारहीनता नजर आ रही है। समाज में भाई-भाई का शत्रु व पुत्र पिता को चंद रुपयों की खातिर मृत्यु के घाट उतारता हुआ नजर आ रहा है। लेकिन प्रश्न यह है कि ऐसी स्थितियों को सुधारा कैसे जाए। तो उत्तर यही है कि जैसे गणिका वेश्या, अंगुलि मार डाकू, सज्जन ठग एक ब्रह्मनिष्ठ गुरु के ज्ञान के माध्यम से पापियों से भक्तआत्मा की श्रेणी में आकर खड़े हुए, वैसे ही आज व्यक्ति व समाज को भी ऐसे ही गुरु की आवश्यकता है। वही गुरु मानव में ब्रह्मज्ञान से शांति की स्थापना कर समाज और फिर देश तथा विश्व को भी शांत कर सकता है। फिर ही समाज में एक भव्य क्रांति आ सकती है। 
कथा में बहुत से गणमान्य सज्जन श्री अश्विनी सेखड़ी एक्स कैबिनेट मिनिस्टर पी बी,डॉ नरेश अग्रवाल,श्री परमजीत सिंह गिल,श्री वी एम गोयल, श्री नरेश महाजन,एक्स प्रेसिडेंट नगर निगम बटाला,श्रीमती सुधा महाजन एमसी बटाला,श्री राकेश अग्रवाल,श्री अशोक अग्रवाल,श्री अंजन बंसल,श्री राजीव विग, साध्वी कवल भारती,स्वामी रणजीतानंद जी उपस्थित हुए l
कथा में भजनों के श्रवण से उपस्थित श्रद्धालुओं ने खूब आनंद उठाया। कथा का समापन प्रभु की आरती से किया गया।

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