बेटियों से ज्यादा बेटों को महत्व दिया जाता है इसलिए इन में एक समानता लाने के लिए संतुलन प्रकल्प चलाया जा रहा है :-- दिव्य ज्योति
बटाला दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से स्थानीय बटाला आश्रम में लोहड़ी का पर्व धूमधाम से मनाया गया । संस्थान के द्वारा चलाए जा रहे संतुलन प्रकल्प के अंतर्गत ' कन्या बचाओ ' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य साध्वी शंकरप्रीता भारती जी ने कहा कि समाज में एक बहुत बड़ी बुराई पनप रही है। जिस प्रकार से समाज के दृष्टिकोण से देखा जाए, तो स्त्री पुरुष को समान अधिकार दिए गए हैं एवं बेटे और बेटी में कोई भेदभाव नहीं किया जाता। पर अगर वास्तविकता में देखा जाए तो बेटियों से ज्यादा बेटों को महत्व दिया जाता है। इसलिए इन में एक समानता लाने के लिए संतुलन प्रकल्प चलाया जा रहा है। क्योंकि अगर स्त्री और पुरुष में संतुलन होगा, तभी समाज सुव्यवस्थित हो पाएगा।
कुछ लोगों का मानना है कि समाज लोगों के विचार बहुत दूषित हो चुके हैं। बेटियां अपने आप में इस संसार में असुरक्षित महसूस कर रही हैं। इसलिए कई लोग चाहते हैं कि बेटियों का जन्म ही ना हो। लेकिन हमें अपनी मानसिकता और संकीर्णता के दायरे से बाहर आना होगा अगर आज हमारी एकाग्रता बेटी के साथ साथ बेटे पर भी होगी, तो किसी भी पुरुष से स्त्री सुरक्षित नहीं होगी। संस्था नारी समाज को सदैव ऊंचा उठाने के लिए प्रयासरत हैं। छोटे-छोटे गांव से लेकर बड़े-बड़ शहरों तक लोगों को जागरूक करने के लिए ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। जिनके द्वारा लोग समझ सकें, कि यदि बेटा महान है, तो बेटी भी महान है। लोहड़ी पर्व के ऊपर जब लोहड़ी जलाई जाती है। तो उसमें काले तिलों की आहुति दी जाती है। जिसके पीछे एक अध्यात्मिक कारण भी छिपा हुआ है। अगर हम समाज को सुंदर रूप देना चाहते हैं तो हमें अपने बुरे विचारों एवं बुरी आदतों की आहुति डालनी होगी। जैसे एक-एक इकाई के जुड़ने से समाज बनता है। वैसे ही एक-एक इकाई में अगर परिवर्तन आ जाए तो समाज अपने आप ही सुधर जाता है। इस के लिए आवश्यकता है कि हर व्यक्ति के अंदर ब्रह्म ज्ञान की अग्नि प्रज्वलित की जाए। ब्रह्म ज्ञान की अग्नि में ही सभी बुरे कर्म संस्कार जलकर राख हो पाएंगे। कार्यक्रम के अंत में साध्वी बहनों द्वारा पहुंचे हुए श्रद्धालुओं को लोहड़ी की बधाई दी गई एवं सुमधुर भजनों का गायन भी किया गया।
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