लोक परलोक दोनो के कल्याण का मार्ग दिखलाती है गीता :- शास्त्री शंभू प्रसाद

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बटाला 1  दिसंबर ( अविनाश शर्मा ) श्री मदभागवत गीता समस्त उपनिषदों का सार है  मार्गशीर्ष माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन कुरुक्षेत्र में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को माध्यम बनाकर संपूर्ण मानव जाति के कल्याण के लिए गीता का उपदेश दिया था। तभी से मार्गशीर्ष माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी पर गीता जयंती मनाई जाती है इस वर्ष गीता जयंती 3 दिसंबर को मनाई जा रही है । इस संबंधी जानकारी देते हुए  शास्त्री शंभू प्रसाद ने बताया कि गीता में ज्ञान योग, भक्ति योग , आदि के अतिरिक्त तप ध्यान प्राणायाम यज्ञ और योग आदि साधना का भी वर्णन किया गया है इसका कारण यह है कि जब अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण से महाभारत युद्ध में अपने रिश्तेदारों से ही युद्ध करने और अपने प्राणों से प्यारे घर के सदस्यों को ही मारकर युद्ध में जीत का प्रश्न पूछा तो भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को समझाते हुए कहा यह युद्ध सबके कल्याण के लिए है इसी में ही तुम्हारा भी कल्याण है इसलिए भगवान श्री कृष्ण ने शास्त्रों और उपनिषदों में जितने भी कल्याण कारक साधन है का वर्णन महाभारत युद्ध में अपना विराट रूप धारण करके किया। श्रीमद्भागवत गीता उपनिषदों और शास्त्रों का  सार है महर्षि वेदव्यास जी ने कहा है कि सब उपनिषद गाय के समान है भगवान श्री कृष्ण ग्वाले के समान है और अर्जुन बछड़े के समान है इस तरह से ग्वाला दूध दोहने से पहले बछड़े को गाय के नीचे छोड़ता है उसी तरह से अर्जुन रूपी बड़े ने माधव भगवान कृष्ण से प्रश्न किए भगवान श्री कृष्ण ने उपनिषदों और शास्त्रों को दोह कर उनका सार महाभारत के युद्ध में अर्जुन को बताया इसलिए तब से ही सभी उपनिषदों का सार ही गौरव स्वरूप गीता ज्ञान माना जाता है। गीता हमें लोक परलोक दोनों में कल्याण में मार्ग दिखाती है सर्वश्रेष्ठ ज्ञान, विमल भक्ति ,उज्जवल कर्म ,यम ,नियम, त्रिविध तप ,अहिंसा सत्य और दया का उपदेश देती है इसके साथ-साथ अधर्म का मार्ग छोड़कर हमें धर्म के मार्ग पर चलने का उपदेश देती है मनुष्य का कर्तव्य क्या है इसका बोध कराना ही गीता का मुख्य उद्देश्य है गीता हमें जीवन जीने की कला सिखाती है सत्कर्म करते हुए जीवन जीने की शिक्षा देती है श्रीमद्भागवत गीता दुनिया का सबसे श्रेष्ठ ग्रंथ है। इस ग्रंथ का पाठ करने वाला व्यक्ति जीवन में कभी भी परेशान नहीं हो सकता है। श्रीमद्भगवद्गीता का अनुसरण करने वाले व्यक्ति को मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस वर्ष 3 दिसंबर को गीता जयंती मनाई जा रही है।

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