जम्मू/कठुआ :-जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कठुआ के किड़ियां-गंडयाल क्षेत्र में रावी नदी पर हो रहे कथित अंधाधुंध खनन और उससे जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों का मुद्दा प्रमुखता से उठा है। कठुआ के विधायक ने सदन में सरकार से सवाल कर जनहित से जुड़ी समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया।
विधायक ने सदन में पूछे ये तीखे सवाल
विधायक ने सरकार से सवाल करते हुए पूछा कि क्या रावी नदी में लगातार हो रहे खनन के कारण भूजल स्तर में भारी गिरावट आई है? उन्होंने कहा कि भागथली, रैपर और नड़ोलियां जैसे निचले गांवों में बोरवेल सूख गए हैं, जिससे स्थानीय जनता को गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही विधायक ने यह भी पूछा कि क्या सरकार भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने और स्थानीय किसानों तथा आम जनता को राहत पहुंचाने के लिए किड़ियां-गंडयाल क्षेत्र में चेक डैम बनाने की कोई योजना रखती है, और यदि हां, तो इसके लिए क्या समयसीमा तय की गई है?
सरकार का जवाब: भूजल गिरावट का कोई आधिकारिक संकेत नहीं
विधायक के सवालों का उत्तर देते हुए सरकार की ओर से कहा गया कि उक्त क्षेत्र में खनन गतिविधियों के कारण भूजल स्तर में गिरावट आने या बोरवेल सूखने का कोई संकेत देने वाली रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है।
सरकार द्वारा पेश किए गए जवाब के अनुसार, जिला खनिज अधिकारी, कठुआ ने बताया है कि किड़ियां-गंडयाल और उसके आसपास के क्षेत्रों में खनन गतिविधियों की नियमित रूप से निगरानी की जा रही है। इसके लिए विभागीय स्तर पर क्षेत्रीय निरीक्षण किए जा रहे हैं। साथ ही, अवैध खनन पर रोक लगाने और लघु खनिजों के वैध निष्कर्षण तथा परिवहन को सुनिश्चित करने के लिए विशेष रूप से रावी नदी के किनारे दिन-रात के नाके स्थापित कर कड़ी नजर रखी जा रही है।
सरकारी रिपोर्ट और जमीनी हकीकत पर उठे सवाल
सरकार के इस जवाब के बाद अब विभागीय रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि स्थानीय स्तर पर लगातार अवैध खनन, गिरते जलस्तर और बोरवेल सूखने की शिकायतें आ रही हैं, तो विभागीय रिपोर्ट और जमीनी स्थिति के बीच के अंतर की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या संबंधित विभाग ने भूजल स्तर, नदी तल की गहराई और खनन की वास्तविक मात्रा का कोई वैज्ञानिक व क्षेत्रवार अध्ययन किया है या केवल औपचारिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनहित के मुद्दों पर विधानसभा में पेश किए जाने वाले उत्तर वास्तविक जमीनी स्थिति पर आधारित होने चाहिए, ताकि वास्तविक समस्या का समाधान हो सके और प्रशासन की जवाबदेही तय की जा सके।
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