बल ,बुद्धि ,विद्या और रिद्धि -सिद्धि के दाता श्रीहनुमान जी।

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बल ,बुद्धि ,विद्या और रिद्धि -सिद्धि के दाता श्रीहनुमान जी।





 पठानकोट, (पंकज) : सिद्ध शक्तिपीठ बाबा लाल दयाल मंदिर गोसाईपुर धाम में हनुमान जयंती के अवसर पर विशेष पूजन अर्चन के साथ सुंदरकांड एवं हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। इस अवसर पर विशेष रूप से वक्तव्य देते हुए मंदिर के संचालक एवं धर्माचार्य राजपुरोहित पंडित रमेश शास्त्री जी महाराज ने कहा कि हनुमान जी अजर अमर हैं । और वे अनेकों रूपों में अपने भक्तों को रिद्धि सिद्धि प्रदान करते हैं । 



पंचमुखी हनुमान के पांच मुख पांच दिशाओं में हैं। हर रूप एक मुख वाला, त्रिनेत्रधारी यानी तीन आंखों और दो भुजाओं वाला है।

यह पांच मुख इस प्रकार से है।

1 :- नरसिंह रूप ,पंचमुखी हनुमान का दक्षिण दिशा का मुख भगवान नृसिंह का है। इस रूप की भक्ति से सारी चिंता, परेशानी और डर दूर हो जाता है।

२- गरुड रूप , पंचमुखी हनुमान का पश्चिमी मुख गरूड का है। जिसके दर्शन और भक्ति संकट और बाधाओं का नाश करती है।

३- अश्व रूप ,पंचमुखी हनुमान का पांचवा मुख आकाश की ओर दृष्टि वाला होता है। यह रूप अश्व यानी घोड़े के समान होता है। श्रीहनुमान का यह करुणामय रूप होता है। जो हर मुसीबत से रक्षा करने वाला माना जाता है।

४- वानर रूप पंचमुखी हनुमान का पूर्व दिशा में वानर मुख है। जो बहुत तेजस्वी है। इसकी उपासना या दर्शन से विरोधी या शत्रु पराजित हो जाता है।

५- वराह रूप पंचमुखी हनुमान का उत्तर दिशा का मुख वराह रूप होता है। जिसकी सेवा-साधना अपार धन, दौलत, ऐश्वर्य, यश, लंबी आयु, स्वास्थ्य देती है।

पंचमुख हनुमान की साधना से जाने-अनजाने हुए सभी बुरे कर्म और विचारों के दोषों से छुटकारा मिलता है।

इस अवसर पर शांति देवी,  पंडित सूरज शास्त्री,  पंडित शुभम शुक्ला वेदपाठी,  रोहित , कपिल,  मृदुल आदि उपस्थित थे।

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